हे दुःख भन्जन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार

हरी ॐ शरण
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार |

पवनसुत विनती बारम्बार ||

अष्ट सिद्धि नव निद्दी के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविदाता |

सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उधार ||

अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी |

भक्ति भाव से ध्याऊं तुम्हे, कर दुखों से पार ||

जपूं निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा |

राम भक्त मोहे शरण मे लीजे भाव सागर से तार ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।