नाम हरी का जप ले बन्दे

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

नाम हरी का जप ले बन्दे,

फिर पीछे पछतायेगा ।

तू कहता है मेरी काया,

काया का घुमान क्या ।

चाँद सा सुन्दर यह तन तेरे,

मिटटी में मिल जाएगा ॥

फिर पीछे पछतायेगा

बाला पन में खेला खाया,

आया जवानी मस्त रहा ।

बूडा पन में रोग सताए,

खाट पड़ा पछतायेगा ॥

वहां से क्या तू लाया बन्दे,

यहाँ से क्या ले जाएगा ।

मुठ्ठी बाँध के आया जग में,

हाथ पसारे जाएगा ॥

जपना है सो जपले बन्दे,

आखिर तो मिट जाएगा ।

कहत कबीर सुनो भाई साधो,

करनी का फल पायेगा ॥

बोल हरी बोल हरी हरी हरी बोल,

मुकुंद माधव गोविन्द बोल ।

बोल हरी बोल हरी हरी हरी बोल,

केशव माधव गोविन्द बोल ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।