गुरु बिन मुक्ति नाही

मीरा बाई
सूर्य देव भजन गुरुदेव भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

समझ मन मेरा गुरु बिना मुक्ति नाही ||टेर||

नीच वर्ण रविदास चमारा, गुरु किया मीराबाई |

विष का प्याला अमृत हो गया, गुरु महिमा तो जद गाई ||1||

चार वेद षट शास्त्र पढिया, पढिया सुखमुनि राई |

गया वैकुण्ठ मोड दिया पाछा गुरु ऐसा करे जद नाही ||2||

गुरु बिन कल्याण नही किसी का, लाख करो चतुराई |

भँवरलाल परस्या गुरुपद को ,धिन -धिन मौज सवाई ||3||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।