बनी बनी रे जोगन

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बनी बनी रे जोगन मैं तो तेरे नाम की

बांके बिहारी मेरा सजन है,फिर मुझको किस बात का गम है,

मुझपे मेरे प्रीतम का कर्म है,गेरे किस ते क्यों मुझको गगन,

बनी बनी रे जोगन मैं तो तेरे नाम की

तेरे नाम की ओड चुनरियाँ तेरी जन्नत उनकी दुअरियाँ,

दया का सागर मेरा सांवरियां,

चाहत में उनकी मैं हो गई मगन,

बनी बनी रे जोगन मैं तो तेरे नाम की

क्यों न पिया पे तन मन वारु,

क्यों न साजन का सदका उतारू,

क्यों न इनकी और निहारु,

मेरी बफा बन गई है दुल्हन,

बनी बनी रे जोगन मैं तो तेरे नाम की

सूरदास के नैनं तारे,

श्री हरिदास के प्राणां प्यारे,

यश के तो अरमान तुम्ही हो,

पागल माने है तुमको सजन,

बनी बनी रे जोगन मैं तो तेरे नाम की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।