सूरज की गर्मी से जलते हुए

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम |

भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा |

लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा |

इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी |

उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी |

युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया |

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ |

फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ |

पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया |

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।