मेरी खुशियों का नही है ठिकाना

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी खुशियों का नही है ठिकाना के मेरे घर साईं आये है,

चन्दन की चोंकी मैं सजाऊ गंगा जल से पाओ धुलाऊ,

फूलो की माला पहनाकर माथे चंदन तिलक लगाऊ,

ज़रा पूजा की थाली सजाना के मेरे घर साईं आये है,

मेरी खुशियों का नही है ठिकाना.....

नाचे मन हो कर मतवाला मुझसा न कोई किस्मत वाला,

मेरे घर आया है देखो बाबा मेरा शिर्डी वाला,

मन झूम के गाये तिराना के मेरे घर साईं आये है,

मेरी खुशियों का नही है ठिकाना...

झोली खुशियों से भर देगे काम सभी पुरे कर देंदे,

कामना दिल में जो है सबके अज्ज सभी पूरी कर देंगे,

मैं नाचूगा बनके दीवाना के मेरे घर साईं आये है,

मेरी खुशियों का नही है ठिकाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।