जरे जरे में हैं झांकी भगवान की

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

जरे जरे में हैं झांकी भगवान की,

किसी सूझ वाली आँख ने पहचान की ।

नामदेव ने पकाई, रोटी कुत्ते ने उठाई,

पीछे घी का कटोरा लिए जा रहे ।

बोले रुखी तो ना खाओ, प्रभु घी लेते जाओ,

रूप अपना क्यूँ मुझ से छिपा रहे ।

तेरा मेरा एक नूर, फिर काहे को हजूर,

तुने शकल बनाई यह श्वान की,

मुझे ओडनी उडादी इंसान की ॥

निगाह मीरा की निराली, पी के ज़हर प्याली,

ऐसा गिरिधर बसाया हर श्वास में ।

आया जब काला नाग, बोली धन्य मेरे भाग्य,

प्रभु आये आज नाग के लिबास में ।

आओ आओ बलिहार, काले कृषण मुरार,

बड़ी कृपा हैं कृपानिधान की ।

धन्यवादी हूँ मैं आप के एहसान की ॥

इसी तरह सूरदास, निगाह जिनकी थी ख़ास,

ऐसा नैनो में था नशा हरी नाम का ।

नयन जब हुए बंद, तब मिला वह आनंद,

आया नज़र नज़ारा घनश्याम का ।

हर जगह वो समाया, सारे जग को दिखाया,

आई आँखों में रोशनी ज्ञान की,

देखि झूम झूम झांकी भगवानी की ॥

गुरु नानक कबीर सही जिनकी नजीर,

देखा पत्ते पत्ते में निरंकार को ।

नज़दीक और दूर, वोही हाज़र हजूर,

यही सार समझाया संसार को ।

नत्था सिंह यह जहान, शहर गावं बिआवान,

मेहरबानिआन हैं उसी मेहरबान की ।

साड़ी चीज़ें हैं एक ही दूकान की ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।