पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ।

भीड़ पड़ी अब भारी हे बजरंगबली,

भक्तो के दुःख दूर मेरे हनुमान करो ॥

गयारवे हो रूध्र तुम हो, ले के अवतारी,

ज्ञानियो में आप ग्यानी योधा बलशाली ।

बाल अवस्था में चंचल आप का था मन,

सूर्य को तुम खा गए नटखट बड़ा बचपन ।

मैं हूँ निर्बल बल बुद्धि का दान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

श्री राम का तुम सा ना सेवक और है दूजा,

आज घर घर में तुम्हारी हो रही पूजा ।

दीन दुखिओं की कतारें द्वार पे लम्बी,

आप की महिमा को सुन कर आया मैं भी ।

अपने भक्तों का बजरंगी मान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

हे बजरंगी अब दया की कीजिये दृष्टि,

गा रही महिमा तुम्हारी यह सारी सृष्टि ।

आपकी कृपा हो जिसपे, राम मिले उसको,

बेदड़क आया ‘लक्खा’ अब और कहूँ किसको ।

दया की दृष्टि तुम मुझपर बलवान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।