साँची प्रीत जो तुम सो जोरी

संत रविदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँची प्रीत जो तुम सो जोरी ।

तुमसो ज़ोर सबन सो तोरी ॥

जो तुम तोरो पिया मैं ना तोरूँ।

तुम संग तोरि कवनि संग ज़ोरूँ ॥टेक॥

मोहे तीरथ व्रत को नहीं अदेसा,

तुम्हरे चरन कमल का भरोसा।

मैं जहाँ जहाँ जाऊँ तुम्हारी सेवा,

तुम सा ठाकुर और ना देवा ॥

जो तुम तोरो पिया मैं ना तोरूँ।

तुम संग तोरि कवनि संग ज़ोरूँ ॥टेक॥

मैं अपना मन हरि सौं जोरयौ,

हरि सौं जोरि सबनि सौं तोरयौ।

मोहे मन क्रम वचन तुम्हारी

आसा ऐसी भक्ति करे रैदासा

भजन गायक - हर्ष शर्मा ( वृन्दावन ) YouTube- Harsh Vrindavan

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।