मोको कहाँ ढूंढें बन्दे मैं तो तेरे पास में

संत कबीर
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मोको कहाँ ढूंढें बन्दे,

मैं तो तेरे पास में ।

ना तीरथ में ना मूरत में, ना एकांत निवास में ।

ना मंदिर में, ना मस्जिद में, ना काबे कैलाश में ॥

ना मैं जप में, ना मैं तप में, ना मैं व्रत उपास में ।

ना मैं क्रिया क्रम में रहता, ना ही योग संन्यास में ॥

नहीं प्राण में नहीं पिंड में, ना ब्रह्माण्ड आकाश में ।

ना मैं त्रिकुटी भवर में, सब स्वांसो के स्वास में ॥

खोजी होए तुरत मिल जाऊं एक पल की ही तलाश में ।

कहे कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विशवास में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।