श्री गुरुरविदास अवतार परब

संत रविदास
सूर्य देव भजन गुरुदेव भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

अज लख लख होंण वधाईयां, सतगुरु परब दीयां ।।

काशी विच प्रगटया, नूर ब्रहमण्ड दा।

होया जग चानना, जोत आखण्ड दा।।

रब्ब धरती ते लईयां अंगड़ाईयां सतगुरु परब दीयां.

रब्बी नूर पा के मात पिता मालामाल होए।

करके दीदार संत भगत, निहाल होए ।।

वजन वाजे ढोल शनाईयां सतगुरु परब दीयां.

रूत बसंती ते, सुन्दर नज़ारे ने।

गुरू रविदास जी दे गूंजदे जैकारे ने।।

फुलां कलियां ने झड़ीयां लाईयां-सतगुरु परब दीयां.

ज़ात पात वाले गुरां, भेत मिटा दित्ते।

भुल्ले भटके 'मधुप', सिधे राह पा दित्ते ।।

सारा जग करदा ए वडिआईयां-सतगुरु परब दीयां.

लेखकः एडवोकेट केवल कृष्ण गुप्ता'मधुप' (मधुप हरि)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।