महाकुंभ पर्व है आया

श्रीकेवल कृष्ण मधुप (मधुप हरि महाराज)
माता सरस्वती भजन विविध भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

महाकुंभ पर्व है आया

गंगा यमुना सरस्वती संगम, तीर्थराज प्रयाग, महाकुंभ पर्व है आया ॥

अध्यात्मिक सांस्कृतिक धार्मिक, सजे सुमंगल साज, महाकुंभ पर्व है आया ॥

सागर मंथन का यह, गर्वमयी सनातन इतिहास है, मंथन से मिली जो भी, अद्भुत अलौकिक सौगत है।

सागर से धन्वंतरी प्रगटै, अमृत कलश ले हाथ, महाकुंभ पर्व है आया ॥

जगतगुरू महामंडेश्वर, साधुसंत महापुरुष आए हैं। सभी अध्यक्ष अपने अपने, अखाड़ों संग आए हैं।

बजे ढोल नरसिंघे नगाड़े, हो रहा शंख नाद, महाकुंभ पर्व है आया ॥

कई दिनों तक महाकुंभ का, यह पावन स्नात है, महामोक्ष का मधुप यही, शुभ बेला समय स्थान है।

देश विदेश से लाख करोड़ों, कुंभ स्नान को आत, महाकुंभ पर्व है आया ॥

लेखक : श्रीकेवल कृष्ण मधुप (मधुप हरि महाराज)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।