गुरुदेव मेरे गुरुदेव मेरे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे ,

जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है,

है तू जहाँ पर, मंज़िल भी वहीँ है ।

गुरुदेव मेरे..........

गंगा यमुना बहती है, गुरुवर तेरे चरणों में ,

मेरा सब जीवन है गुरुवर, तेरे चरणों में ,

मुझे जीना भी यहीं है, मुझे मरना भी यहीं है ।

गुरुदेव मेरे..........

तेरी ये लीला गुरुवर, जग में न्यारी है,

सारा जग पूजे तुझको, तू सबका मालिक है ,

मुझे जीना भी यहीं है, मुझे मरना भी यहीं है,

गुरुदेव मेरे..........

मेरे ज्ञान के चक्षु गुरुवर, तुमने खोले है,

अच्छी राह दिखाते गुरुवर, कितने भोले है ,

मेरे माता भी तुम्हीं हो, मेरे पिता भी तुम्हीं हो,

गुरुदेव मेरे..........

तुमसे मिलने को गुरुवर, दिन रात मैं रोता हूँ ,

कैसे तुमसे मिल पाऊँ, येही सोचा करता हूँ ,

मुझमें शक्ति भी नहीं है, मुझमें भक्ति भी नहीं है

गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे ,

जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है,

है तू जहाँ पर, मंज़िल भी वहीँ है ।

गुरुदेव मेरे..........

संकलनकर्ता :- राज कुमार नामदेव, बिजनौर ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।