नमस्कार देवी शिवे कल्याणी

रहीम दास
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नमस्कार देवी शिवे कल्याणी ।

दो भक्ति का वरदान दुर्गे भवानी॥

जिधर देखते हैं उधर तू-ही तू-है।

हर शै में जलवा तेरा हू-ब हू-है॥

तेरी जुस्त जू है,तेरी गुफ्तगू है।

तू घट घट बसै ,तेरी लीला लासानी॥

नमस्कार देवी......

तू ही शैलपुत्री तू ही दक्षबाला।

तू ही वैष्णो कालका चण्डी ज्वाला॥

उमां रमां सरस्वती जग की पाला।

तू ही देव दानव ,करें नज़रानी॥

नमस्कार देवी......

तेरी रहीमतों का नहीं है ठिकाना।

है दीदार तेरा दया का खजाना॥

तेरे खज़ाने से लेता है जमाना।

तेरी बख्शिशों की ,बड़ी मेहरबानी॥

नमस्कार देवी.......

नहीं जानते हैं तेरी कुछ भी माया।

बनें हैं वहीं हम ,जो तूने बनाया॥

तेरी कृपा से है जीवन यह पाया।

‘‘मधुप’’ की भव बाधा ,हरो महारानी॥

नमस्कार देवी...... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।