हे री कोई आया हे जगत मे

संत रविदास
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

हे री कोई आया हे जगत मे. आतम ग्यान कराने वाला।

आतम ग्यान करने वाला . रविदास कहाने वाला॥

नहाने के बहाने मै तो. गंगा पर गई थी।

हे री वे तो गंगा मे समाएँ ...........॥

पुजा के बहाने मैतो. मन्दिर मे गई थी ।

हे री वे तो ज्योति मे समाएँ..........॥

दर्सन के बहाने मतो. सत्सग मे गई थी ।

हे री वे तो संतो मे समाएँ............॥

कह मीरा रविदास जी की चेली .सुनियो हे मेरी सखी सहेली ।

हे री गुरू हदय मे समाएँ...........॥

आत्म ग्यान करने वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।