माँ की हर बात निराली है

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

पास की सुनती है, दूर की सुनती है,

गुमनाम के संग संग मशहूर की सुनती है ।

माँ तो आखिर माँ है माँ के भक्तो,

माँ तो हर मजबूर की सुनती है ॥

माँ की हर बात निराली है,

बात निराली है, के हर करामात निराली है,

महा दाती से सब को मिली सौगात निराली है ॥

वक़्त की चाल बदले, दुःख की जनझाल बदले,

इसके चरणों में झुककर, बड़े कंगाल बदले ।

यहाँ जो आये सवाली, कभी वो जाए न खली,

यह लाती पतझर में भी, हर चमन में हरिआली ।

काली रातो ने लाती प्रभात निराली है ॥

दया जब इसकी होती, तो कंकर बनते मोती,

जिसे यह आप जगादे, ना फिर किस्मत वो सोती ।

गमो से घिरने वाले, बड़े इस माँ ने संभाले,

फसे मझदार में बेड़े, इसी में बाहर निकाले ।

इसकी मीठी ममता की बरसात निराली है ॥

दुःख ताकती है यह, सुख बांटती है जी, हमे पालती है ये दिनरात ही ।

जादू इसका अजीब, देखो हो के करीब, यह तो बदले नसीब दिन रात ही ।

इस की रहमत हर निर्दोष के साथ निराली है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।