हाथ में लेके इकतारा वा कृष्ण कृष्ण बोलै

संत रविदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मतवाली मीरा सत्संग करती डोलै,

हाथ में लेके इकतारा वा कृष्ण कृष्ण बोलै.....

छोड़ दिया उसने खाना पीणा, छोड़ दिया घर बार,

भूल गई वा जग का झमेला, भूली घर परिवार,

कृष्ण जी के भजन बनावै, झूम झूम के डोलै.....

कृष्ण जी के भजन सुनावै, झूम झूम के नाचीं,

गुरू बना लिए रविदास हे उसके संग में राजी,

जात पात का भेद न समझें, वा लाखन में डोलै.....

दर दर फिरै भटकती डोलै, मिला ना कृष्ण प्यारा,

भक्ति का यो रोग जगत में, सब रोगों से न्यारा,

जिसके भी यो रोग लगै, यो तुरत कालजा छोलै......

श्याम सुंदर शर्मा उसके सै, लग्न श्याम पावण की,

शाम विरह में फिरै भटकती, दर्श श्याम पावण की,

जो भी उसके बोल सुनै सै, अंदर के पट खोलै.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।