मेरी आखिओं के सामने ही रहना शेरों वाली जगदम्बे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी आखिओं के सामने ही रहना,

माँ शेरों वाली जगदम्बे ।

हम तो चाकर मैया तेरे दरबार के,

भूखे हैं हम तो मैया बस तेरे प्यार के ॥

विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर माँ,

चरणों से हमको कभी करना ना दूर माँ ॥

मुझे जान के अपना बालक सब भूल तू मेरी भुला देना,

शेरों वाली जगदम्बे आँचल में मुझे छिपा लेना ॥

तुम हो शिव जी की शक्ति मैया शेरों वाली ।

तुम हो दुर्गा हो अम्बे मैया तुम हो काली ॥

बन के अमृत की धार सदा बहना,

ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

तेरे बालक को कभी माँ सबर आए,

जहाँ देखूं माँ तू ही तू नज़र आये ।

मुझे इसके सीवे कुछ ना कहना,

ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

देदो शर्मा को भक्ति का दान मैया जी,

लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान मैया जी ।

है भजन तेरा भक्तो का गहना,

ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।