जलवा मेरे साई का रहता है

रहीम दास
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॥ पावन पाठ ॥

अल्लाह है साई ईश्वर है साई कण कण में है साई,

पशु पक्षी और पेड़ पौधे, जल जल में है साई,

जलवा मेरे साई का रहता है फिज़ाओ में,

रुतबा मेरे बाबा का दिखता है दुआओ में......

पानी से दीप जलाया हुई रोशन ईद दिवाली,

वो नीम की छाँव में बेठा उसकी सरकार निराली,

खुशबु की तरह बिखरा साईं नाम हवाओ में,

जलवा मेरे साई का रहता है फिज़ाओ में,

रुतबा मेरे बाबा का दिखता है दुआओ में…..

हर बिगड़े काम बनाता राजा वो शिर्डी वाला,

दर पर उसके जो जाये,

खुलता किस्मत का ताला,

सूरज की किरण में वो सावन की घटाओ में,

जलवा मेरे साई का रहता है फिज़ाओ में,

रुतबा मेरे बाबा का दिखता है दुआओ में…….

राई को बना दे पर्वत, पर्वत को बना दे राई,

वो नंगे पाँव ही लौटी, जितनी भी क़यामत आई,

वो राम रहीम बना, भक्तों की निगाहों में,

जलवा मेरे साई का रहता है फिज़ाओ में,

रुतबा मेरे बाबा का दिखता है दुआओ में….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।