तेरा दर है साईं बड़ा दर

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन साईं भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर है साईं बड़ा दर तेरे दर पे मैं वारी जाऊ,

तेरे दर के लिए है मेरा सिर तेरे दर के मैं वारी जाऊ,

तेरी जननत वाली है टोली,

तेरी बरकत वाली है झोली,

तेरी रहमत वाली है चादर,

तेरे दर के मैं वारी जाऊ,

मेरा साईं मेरा मन मोहन है,

तेरे प्यार से मेरा जीवन है,

जाऊ कहा उठ कर मैं याह से,

तेरे दर में मैं वारी जाऊ,

ये बन्दा दुःख का मारा है,

मेरा कोई नही सहारा है,

शारदा से पूरी का साईं का सागर,

तेरे दर पे मैं वारी जाऊ,

तेरी चोकाथ की खातिर साईं जन्नत को भी ठुकरा दूगा,

तेरे चरणों में सब कुछ पाया

तेरे दर पे मैं वारी जाऊ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।