मेला है मेला है बैसाखी दा ये मेला है

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी गुरुदेव भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

चारे पासे धूम मची है खुशिया दा वेला है

मेला है मेला है वैसाखी दा ये मेला है......

भगत प्यारे मेला वेखन आये दर ते तेरे जी,

रेहमत करदी सतगुरा ने नाम बड़ा अलबेला जी,

मेला वेखन आया हर कोई नाल गुरु दे चेला है,

मेला है मेला है वैसाखी दा ये मेला है......

मंदिर सोने खूब सजे है लगियाँ रौनका भरी,

नचन गावन भगत जैकारे लावन बारो बारी,

मेला है मेला है वैसाखी दा ये मेला है......

दासन दास चरणा विच तेरे शीश झुकावे,

हरपल है गुण गान करदा दर ते आवे,

लंगर चलदे दिन राति ना लगे पैसा तेला है,

मेला है मेला है वैसाखी दा ये मेला है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।