में कई पाप किदो यमदुंता

चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी
श्री राम गुरु वाणी विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

में कई पाप किदो यम दुता धीरे दो कोड़ा की,

माता पिता को केणो न मान्यो , न तो सुनतो वाकी,

बुढापा में हीडा न किदा , न उड़ाई माकी ,

गरीबा ने गणो लुटतो, कहतो ब्याज बाकी,

गर्भ घमंड में फिरतो रेतों , नाड राखतो बांकी,

पराई नार ने बेन बना ली , राखी डोरा साखी,

पर्दे मोज्या मानतो थूं , नार बना ली घर की,

भोला ढाला ने दुख देतो थूं , रोगी घृणा वांकी,

झूठ कपट से माया जोड़ी , फेर बोल रियो काकी,

राम नाम कधी न भजतो न सत्संग में झांकी,

नूगरो रेग्यो भाईडा रे थारे , गुरु नाथ नही नाकी,

बुद्धपुरी गुरुदेव भीम जी , शारद माता झांकी,

भेरयो गारी गुरु शरण में , प्रभु सुणज्यो माकी ,

गायक - चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी

89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।