म्‍हारी झोपडी में एक बार आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण गुरु वाणी खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साखी: रंग रंगीले श्‍याम के बरसे रंग अपार'

छीटा जिसके लागेगा होगा भव से पार''

म्‍हारी झोपडी में एक बार आजा,

आजा रे म्‍हारा सेठ सांवरा...

थारे कारण कान्‍हा झुला है डालिया,

झुला रे डाला कान्‍हा झुला रे डालिया

तु तो झुलवाने एक बार आजा

आजा रे म्‍हारा सेठ सांवरा...

थारे कारण कान्‍हा भोजन बनाया,

भोजन बनाया कान्‍हा माखन बनाया

तु तो जिमवाने एक बार आजा

आजा रे म्‍हारा सेठ सांवरा...

थारे कारण कान्‍हा राधा बुलाई

राधा बुलाई संग में रूकमण बुलाई

तु तो रास रचावन आजा

आजा रे म्‍हारा सेठ सांवरा...

uploaded by : हेमन्‍त कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।