गुरु आये रे बरसे फुहार

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी गुरुदेव भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

गुरु आये रे बरसे फुहार अब गुरु आयो रे

दिव्य दिव्य ध्वनि झरे, धर्म ज्ञान आये

हाँ रे आगम बताये, हाँ रे आगम बताये।

हर मन में गुरुवाणी गूंजे रे हो

चौमासा जहाँ करे, मेला लग जाये

मुनिवर के रूप में, जिनवर घर आये

चौका लगाके आओ आहार करवाये

गुरुवर की भक्ति में आओ हम रम जाए

नाचे ये धरती गगन गाये रे

श्रीफल चढ़ाके आओ उत्सव मनाये

गुरुवर की भक्ति का पुण्य कमाये

गुरु के चरण का आज गंधोधक लगाए

करके पूजा भक्ति गुरु का ही गुण गाये

नाचे ये धरती गगन गाये रे

गुरु आये रे बरसे फुहार अब गुरु आये रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।