हा रे रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा में

पारंपरिक
श्री राम गुरु वाणी विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

साखी ॥

रामा श्‍यामा आवजो, कर झुक बहेर करूं ।

अर्ज करू अजमाल रां, थे सुनलिजो हजुर ॥

अजमाल रा कंवर, रानी नेतल रा भंवर

थारा घोडा नें...

अजमाल रा कंवर, रानी नेतल रा भंवर

थारा घोडा नें...

सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा...

रूणीचा में रे मसुरिया में...

सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा

आई भादवा री दूज हो होहो हो हो ,

आई भादवा री दूज , थारे घणी करे घन गुंज

थारा घोडा ने...

आई भादवा री दूज, थारे घणी करे घन गुंज

थारा घोडा ने...सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा

थारो घोडो लागे प्‍यारो हो होहो हो हो

थारो घोडो लागे प्‍याराे दुनिया बाले जय 'जयकारो

थारा घोडा ने...

थारो घोडो लागे प्‍याराे दुनिया बाले जय 'जयकारो

थारा घोडा ने...सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा

रामा सरवर भरियो भारी हो होहो हो हो

रामा सरवर भरियो भारी जिमे नहावे नर नारी

थारा घोडा ने...

रामा सरवर भरियो भारी जिमे नहावे नर नारी

थारा घोडा ने...सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा

होजा भगत पे राजी हो होहो हो हो

होजा भगत पे राजी रखजे रूणीचा मे बाजी

थारा घोडा ने...

होजा भगत पे राजी रखजे रूणीचा मे बाजी

थारा घोडा ने...सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा

अजमाल रा कंवर, रानी नेतल रा भंवर

थारा घोडा नें...

अजमाल रा कंवर, रानी नेतल रा भंवर

थारा घोडा नें...

सांचा रामापीर थारा घोडा ने घुमा दे रे रूणीचा...

बोलिए अजमल घर अवतार की...जय हो

बोलिए मेणादेरा लाल की...जय हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।