ले नाम तु चिंन्तापुणीँ दा

पारंपरिक
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिन्ता दूर तेरी सब कर देगी, ले नाम तु चिन्तपूर्णी दा !!

सिर हथ मेहरा दा धर देगी, ले नाम तु चिंतपूर्णी दा !!

माँ दे उते छडदे डोरा फिकर ऐवे करीया कर !!

माडा तेरा ता माँ होण न देन दी ऐवे न तु डरीया कर !!

पल विच हर दुखः हर देगी ||

चिन्तपूर्णी आध भवानी सबदी चिंन्ता हर दी ए !!

थोड किसे नू आन न देन दी सबदे भण्डारे भरदी ऐ !!

लोड तो बधके तेनू जर देगी ||

चिन्तपूर्णी माँ दे हुन्दीया चिन्ता क्यू तू करदा ऐ !!

हार के हिम्मत क्यू तू भगतां रेहन्दा होके भरदा ऐ !!

झोली खुशीयां दे नाल भर देगी ||

चिन्तपूर्णी माँ दा 'सागर ' पाया किसे ने पार नही !!

तेनू क्यू ऐ लग दा है के माँ तेरी सार नही !!

मुँहो मंगे तेनू वर दे गई ||

《गायक :- कुमार संजीव 》

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।