सेईये सुसाहिब राम सो

पारंपरिक
श्री राम गुरु वाणी राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सेईये सुसाहिब राम सो,

सुखद सुसील सुजान सुर सूचि, सुंदर कोटिक काम सो।।

सेईये सुसाहिब राम सो।

सारद शेष साधु महिमा कहें, गुन गन गायक साम सो,

सुमरि सप्रेम नाम जा सो मति, चाहत चंद्र ललाम सो,

सेईये सुसाहिब राम सो।

गमन बिदेस ना लेस क्लेस को, सकुचत सकृत प्रनाम सो,

साखी ताको बिदित विभीषण, बैठो है अविचल धाम सो,

सेईये सुसाहिब राम सो।

टहल सहल जन महल महल, जागत चारों जुग जाम सो,

देखत दोष ना खिजत रिझत, सुनि सेवक गुन ग्राम सो,

सेईये सुसाहिब राम सो।

जाके भजे तिलक तिलक भये, त्रिजग जोनि तनु ताम सो,

तुलसी ऐसे प्रभु ही भजे जो ना, ताहि बिधाता बाम सो,

सेईये सुसाहिब राम सो,

सुखद सुसील सुजान सुर सूचि, सुंदर कोटिक काम सो,

सेईये सुसाहिब राम सो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।