हाथ कड़ताला पैरां विच कुंगरू

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मीरा बाई नचडी,

मीरा बाई नचडी,

हाथ कडलतला पैरा विच कुंगरू

मीरा बाई नचदी सँवारे नू दसदी,

तेरी बंसुरी पंज सत मोरीया,

श्याम करदा रहा मुदो चोरिया,

हाथ कड़ताला पैरा विच कुंगरू मीरा बाई नचदी,

तेरी बंसुरी ने lलगा श्याम दिल वे,

सहनु यमुना किनारे आके मिल वे,

हाथ कड़ताला पैरा विच कुंगरू मीरा बाई नचदी,

तेरी बंसुरी ने लगाव श्याम फीता

मीरा जहर प्याला श्यामा पीता

हाथ कड़ताला पैरा विच कुंगरू मीरा बाई नचदी

तेरी बन्सुरी पंज सात मोरिया

श्याम काला ते सखिया गोरिया

हाथ कड़ताला पैरा विच कुंगरू मीरा बाई नचदी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।