हरि मैं तो लाख यतन कर हारी

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरि मैं तो लाख यतन कर हारी।

महलन ढूंढा, गिरिबन ढूंढा, ढूंढी दुनिया सारी॥

गोलुक कुंज गली में ढूंढा, ढूंढा वृन्दावन में।

डाल डाल से, फूल पात से, जा पूछा कुंजन में।

बीती की सब कहे हरि ना अब की कहे बनवारी॥

कोई कहे श्री राम है क्या या गौरी काली मैया।

मैं कहू नहीं गोपाल हैं वो एक बन में चरावे गैया॥

उमापति परमेश्वर नहीं, ना नारायण भयहारी।

मीरा का हृदय विहारी, मीरा का हृदय विहारी॥

अंग पीताम्बर मोरे मुकुट, सर माला गले सुहावे।

बहुरूपी बड़े रूप धरे, जिस नाम बुलावो आवे॥

मीरा कहे अब लाज रखो प्रभु आवो मुरली धारी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।