लक्ष्मी जेसी हमरी दुल्हनीया

पारंपरिक
माता लक्ष्मी भजन विविध भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी जैसी हमरी दुल्हनियां,

दुल्हनियां बिन रहा जाये न,

राहा जाये न राहा जाये न,

बिरहा का दुखड़ा सहा जाये न,

याद आते ही आँखों में आये पनियाँ,

दुल्हनियां बिन राहा जाये न,

ऐसी दुल्हनियां के मुखड़े की ज्योति,

जैसे हो सागर का अनमोल मोती,

राहा जाये न राहा जाये न बिरहा का दुखड़ा साहा जाए न,

हम है ग्वाले और महारानियाँ,

दुल्हनियां बिन राहा जाये न,

युग युग की है तृतीया हमारी,

वो हमरी देवी हम उसके पुजारी,

राहा जाये न राहा जाये न बिरहा का दुखड़ा साहा जाए न,

कभी सीता लागे कभी रुक्मणीयाँ

दुल्हनियां बिन राहा जाये न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।