एक वेला करी या दु:खा वेगले

संत तुकाराम
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॥ पावन पाठ ॥

एक वेला करी या दु:खा वेगले

दुरिताचे जाले ऊगओनि

आठवीण पाय हा माझा नवस

रात्री हि दिवस पान्डुरंगा

आठवीण पाय हा माझा नवस

बहु दुरवरी भोगविले भोग

आता पान्डुरंगा सोडवावे

आठवीण पाय हा माझा नवस

तुकाम्हणे काय करिन कुरवंडी

वोवाळुनी सान्डी मस्तक हे

आठवीण पाय हा माझा नवस

रात्री हि दिवस पान्डुरंगा

आठवीण पाय हा माझा नवस

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।