ज्योत जगादी तेरी ज्योत जगादी

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

दादा खेडे तेरे नाम की खटक कसुती लागी स,

ज्योत जगादी तेरी ज्योत जगादी स

हलवा पुरी खीर बनाके करया तेरा भडांरा हो,

रविवार न भकता का तेरे दर प पडरया लारा हो,

जो सच्चे दिल त आया उसकी सोई किस्मत जागी स,

ज्योत जगादी तेरी ज्योत जगादी स....

शकंर का अवतार कहे तु सारे गाम का रुखाला हो,

बडी विता म पडया था दादा तने आण सभांला हो,

सुखा पडया था खेत मेरा तने सामण कि झडी लादी स,

ज्योत जगादी तेरी ज्योत जगादी स......

दादा खेडे अपने दास प करिये एक उपकार हो,

मेरे अगंना फूल खिलादे सुणले मेरी पुकार हो,

मनै सूनी तनै बहोत घण्या की कुल की बेल चलादी स,

ज्योत जगादी तेरी......

सोमपाल न कर कविताइ छदं कसुता टोलिया,

बिट्टू कालखा के भजना न मन मेरा यो मोह लिया,

गुरु सतंराम न साज बजाके भवन म धूम मचादी स,

ज्योत जगादी तेरी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।