भज ले हरी को

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

धुन- परदेसियों से न अख्खियाँ

भजले हरी को, एक दिन तो है जाना ll,

जीवन को यदि, सफल बनाना,

भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

किस का गुमान करे, कुछ भी न तेरा ll,

दो दिन का है यह, रैन बसेरा xll

ख़ाली हाथ आया है और, खली हाथ जाना,

भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

पांच तत्व की, बनी तेरी काया ll,

काया में तेरे, हरि है समाया xll

उसे ढूढ़ने को नहीं, दूर है जाना,

भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

ये धन दौलत, माल खज़ाना ll,

जिस पे हुआ है तूँ, इतना दीवाना xll

आज है तेरा कल का, नहीं है ठिकाना,

भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

हरि नाम की एक, ज्योति जगा ले ll,

जो कुछ किया है, उसे तूँ भुला दे xll

दास कहे गर, मुक्ति जो पाना,

भज ले हरी को,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।