चंदा छुप जा रे बादल में

संत तुलसीदास
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

चंदा छुप जा रे बादल में

म्हारो राम गयो वनवास

राम गयो वनवास,

म्हारो लखन गयो वनवास,

चंदा छुप जा रे,

चंदा छुप जा रे,

चंदा छुप जा रे बादल में,

म्हारो राम गयो वनवास

राम बिना मारी सुनी अयोध्या,

लखन बिना ठकुराई,

सीता बिना म्हारी सुनो रसोई,

कौन करे चतुराई,

चंदा छुप जा रे बादल मे,

म्हारो राम गयो वनवास

आगे आगे राम चलत है,

पीछे लक्ष्मण भाई,

बीच बीच मे चलत जानकी,

शोभा वरणी न जाई,

चंदा छुप जा रे बादल मे,

म्हारो राम गयो वनवास

सावन बरस भादवो बरसे,

पवन चले पुरवाई,

वॄक्ष के निचे तीनो भीगे,

राम लखन सीता माई,

चंदा छुप जा रे बादल मे,

म्हारो राम गयो वनवास

रावण मार राम घर आये,

घर घर बटत बधाई,

मात कौसल्या करत आरती,

तुलसीदास जस गाई,

चंदा छुप जा रे बादल मे,

म्हारो राम गयो वनवास

राम गयो वनवास,

म्हारो लखन गयो वनवास,

चंदा छुप जा रे,

चंदा छुप जा रे,

चंदा छुप जा रे बादल में,

म्हारो राम गयो वनवास

अजय जांगिड़ खूड़

मो. 8058333070

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।