मुझे ना करो चरणों से दूर प्रभु

संत सूरदास
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॥ पावन पाठ ॥

मैनू ना करेओ चरणा तो दूर प्रभु, मेरे कर देओ माफ़ कसूर प्रभु।

मैं तां कीते ने पाप ज़रूर प्रभु, मेरे कर देओ माफ़ कसूर प्रभु॥

मैं पापी, तू बक्शनहारा।

मल्ल लेया मैं प्रभु तेरा द्वारा।

मैनू वी बक्शो ज़रूर प्रभु,

मेरे कर देवो माफ़ कसूर प्रभु॥

गणिका के अवगुण सारे विसारे।

पापी अजामिल जैसे वी तारे।

मैनू वी तारो ज़रूर प्रभु,

मेरे कर देवो माफ़ कसूर प्रभु॥

काम क्रोध दी भारी है सेना।

करा मुकाबला, ताकत है ना।

मेरी विनती करो मंज़ूर प्रभु,

मेरे कर देवो माफ़ कसूर प्रभु॥

जिस दिन दा मैं इस जग विच आया।

पाप करन तो मैं ना घबराया।

हो के अकल शरूर प्रभु,

मेरे कर देवो माफ़ कसूर प्रभु॥

मन मंदिर विच कर उज्यारा।

प्रेम की ज्योति जगावे नंदलाला।

अखिया च आ जावे नूर प्रभु,

मेरे कर देवो माफ़ कसूर प्रभु॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।