मत कर तूँ अभिमान रे बंदे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मत कर तूँ, अभिमान रे बन्दे,

झूठी तेरी, शान रे, मत कर तूँ अभिमान ll

तेरे जैसे, लाखोंआए, लाखों इस, माटी ने खाए ll

रहा न नाम, निशान रे बन्दे, मत कर तूँ अभिमान,

मत कर तूँ, अभिमान रे बन्दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

झूठी माया, झूठी काया, वो तेरा जो, हरि गुण गाया ll

जप ले हरी का, नाम रे बन्दे, मत कर तूँ अभिमान,

मत कर तूँ, अभिमान रे बन्दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

माया का, अन्धकार निराला, बाहर उज्जला, भीतर काला ll

इसको तूँ, पहचान रे बन्दे, मत कर तूँ अभिमान,

मत कर तूँ, अभिमान रे बन्दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे पास है, हीरे मोती, मेरे मन, मंदिर में ज्योति ll

कौन हुआ, धनवान रे बंदे, मत कर तूँ अभिमान,

मत कर तूँ, अभिमान रे बन्दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।