जरा धीरे से बजाना वंशी बजाने वाले

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जरा धीरे से बजना वंसी बजने वाले,

जरा होले से बजना वंसी बजने वाले,

मुरली सुनाने वाले,वंसी वजने वाले,

हाथो मे लकड़ी कांदे का कमरिया॥

कजरारी आखे भोली सुरतरिया॥

गौआ चराने वाले,वंसी वजने वाले,

जरा धीरे से .......

मोर मुकट पीताबर सोहे प्यारी बंसी मेरा मन मोहे॥

बंकि है चितवन बंकि अदा है॥

हो पुल मै रहने वाले,वंसी वजने वाले,

जरा धीरे से .......

वंसी वजने वाले,

मीरा के प्रभु गिरधर नागर ॥

मीरा के प्रभु नटवर नागर ॥

काली अमर रहने वाले,वंसी वजने वाले,

जरा धीरे से .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।