सुख के सब साथी दुःख में ना कोई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई।

मेरे राम, मेरे राम, तेरा नाम एक सांचा दूजा ना कोई॥

जीवन आणि जानी छाया,

जूठी माया, झूठी काय।

फिर काहे को साड़ी उमरिया,

पाप को गठरी ढोई॥

ना कुछ तेरा, ना कुछ मेरा,

यह जग योगी वाला फेरा।

राजा हो या रंक सभी का,

अंत एक सा होई॥

बाहर की तो माटी फांके,

मन के भीतर क्यूँ ना झांके।

उजले तन पर मान किया,

और मन की मैल ना धोई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।