सभा है भरी भगवन

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

सभा है भरी भगवन,भीर पड़ी,

आवो तो आवो हरी,

किसविध देर करी,सभा है भरी भगवन ,

भीर पड़ी आवो तो आवो हरी

पति मोये हारी ये ना बिचारी,कैसे सभा में आवती नारी,

बाजी लगी थी भगवन कपट भरी,आवो तो आवो हरि,किसविध देर करी,

सभा है भरी भगवन भीर पड़ी आवो तो आवो हरी,

हो दुष्ट दु:शासन वस्त्र बिलोचन,खेंच रह्यो मेरे बदन को वासन

नग्न करण की मन मं करी,आवौ तो आवौ हरि,किसविध देर करी,

सभा है भरी भगवन भीर पड़ी आवो तो आवो हरी,

भीष्म पितामह,द्रोण गुरूदेवा,बैठे विदुरजी धर्म के खेवा,

सब की मति में भगवन् धुळ पड़ी आवौ तो आवौ हरि, किसविध देर करी,

सभा है भरी भगवन भीर पड़ीआवो तो आवो हरी,

हाथ पसारो, लाज उबारो, सत्य कहूं प्रभु बेगा पधारो

देवकीनंदन गावै, बणा बिगड़ी, आवौ तो आवौ हरि,किसविध देर करी,

सभा है भरी भगवन भीर पड़ीआवो तो आवो हरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।