बंके जोगिया मैं नाचू दरबार साईं के

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन साईं भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

साईं रहमत से पाये है देवदार साई के ॥

बंके जोगिया माई नाचु दरबार साईं के ॥

दीदार साईं के, दरबार साईं के,

शिर्डी के राजा ने जग मैं केसी धूम मै मचाई ॥

खोल दवारे बाबा बेठा सबकी कर सुनीवई,

जन जन पे हू है उपकार साईं के,॥

बंके जोगिया मैं नाचू दरबार साईं के॥

साईं चरणों मैं मिलती शारदा या सबुरी ॥

साई क्रिपा से ही होती हर एक मन्नत पुरी है,

सचची सेव करे जो सेवादार साई के॥

बंके जोगिया मैं नाचू दरबार साईं के ॥

देवदार साईं के, दरबार साईं के॥

भुल के सारी सुद्भुद नाचु सई जिके आगे॥

तनु करके साई सेवा सोइय नाजीवा जेक,

भोला सागर से भगत हज़ार साईं के॥

बंके जोगिया मैं नाचू दरबार साईं के॥

देवदार साईं दरबार साईं कश्मीर॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।