दरसेगा नूर दिवाने मिलेगा जरूर

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

टेर- दरसेगा नूर दिवाने मिलेगा जरूर,

साहेव का भजन करले दरसेगा नूर

गुरु से अर्ज कर पाओगे मरज जब, बीती जाए जिंदगानी

चेतने की बारी बोलो हरि हरि बोलो हरि हरि

अरे देही का गुमान वन्दे तज देना दूर

प्राण को कमान कर खेच राखो सुन्न तांही, सुरता-निरता वुद्धि

तीनो रोके राखो मांही हरी हरी बोलो हरी हरी

अरे सूली के चढे से होवे चकनाचूर

छोड़े मत साधु संग बार-बार लागे रंग, जग से उचंग लांगे

कालवा से जीते जंग हरी-हरी वोलो हरी-हरी

अरे गुरू की कृपा से होवे खारी का कपूर

लखि सखी पिया खोज लेखा पाओ रोज-रोज, मावस पूनो

पड़वादोज तुरिया संग करले मौज हरी-हरी वोलो हरी-हरी

कहिये कबीर वरसे मौती अबीज हंसा चुगना जरूर

प्रेषक- नरेन्द्र बैरवा(नरसी भगत)

मोबाइल नं- 8905307813

रमेशदास उदासी गुप

गंगापुर सिटी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।