आओ माहरे अंगनिये

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

म्हारा गोरा काला भेरो मैं तो थारी माला फेरु आओ माहरे अंगनिये,

नित करू पूजा पाठ मैं तो जाऊ थारी बात

बाबा आओ माहरे अंगनिये,

मोगरे ऋ माला लायो इतर गुलाल रो

भजन करू मैं बाबा नित थारे नाम रो

मैं हु चरना ना दास माहरी सुनो अरदास

आओ माहरे अंगनिये,

चांदनी चोदस ने बाबो भगता रे घर आवे,

अन धन रहा भण्डार थारे आवेने सुधर जावे

है माहने पुरो विस्वाश रवि राखे थारी आस

आओ माहरे अंगनिये,

सारो जग झूठो बाबा साँचो थारो दर है

माह्ड़ो अंगने बाबा छोटो सो मंदिर है

करो कष्टा रे नाश म्हारे घरा करो

आओ माहरे अंगनिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।