जपो गुरु रविदास जी दा ना भगतो

संत रविदास
सूर्य देव भजन गुरुदेव भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

कौम नु जगाया जिहने बेडा पार लगाया

ओह्दी आज भी है सिरा उते छाँह भगतो,

जपो गुरु रविदास जी दा ना भगतो,

पानी उते पथरी तरौंदा जड़ो वेखियाँ,

वार वार दुनिया ने फेर मथा टेकया,

ओहनू खुद खुदा केहन लगे ता भगतो,

जपो गुरु रविदास जी दा ना भगतो,

चारे जन्जु कड के दिखाए गुरुआ ने ,

इंज जेहड़े मन दे मनाये मेरे गुरा ने,

ओहनू एहमे नहीं मंदा जहां भगतो,

जपो गुरु रविदास जी दा ना भगतो,

गंध वालेया जेहरे गुरा नु ध्याउंदे ने,

हैप्पी सदाई सुख झोली विच पाउंदे ने,

ओह ते हुन्दे ने सदाई हर था भगतो,

जपो गुरु रविदास जी दा ना भगतो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।