शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा

पारंपरिक
शनि देव भजन शनि देव भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा,

आज मेरे जीवन में हार हो गई,

नसीब का फेरा उल्टा रे,

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा,

शनि राजा ने माया दिखाई हंस ने कैसे माला खाई,

अपराध किसका किसको सजा,

कैसा जे नयाये झूठा रे,

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा,

कल का राजा आज भिखारी कैसे हुआ रे मैं अभिचारी,

मैं सब का था कोई न मेरा,

फूल बना आज कांटा रे,

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा,

राजा महल श्मशान हुआ है,भाग जला वीरान हुआ है,

चारो तरफ से संकट का तूफ़ान कैसा उठा रे,

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा,

नर्क यातना न सेह नहीं सकता जी नहीं सकता मर नहीं सकता,

इस हालत में जाऊ कहा मैं सब कुछ मेरा लुटा रे,

शनि देव रूठा रे आस्मां टुटा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।