ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

न्यारी दादी प्यारी दादी म्हारी दादी,

मैं भी मैया थारी बेटी माँ से नजर चुरावे है,

ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

मखमल जैया गोदी माहि माने भी सुलाले,

ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

दादी थारी नगरी माहने पिहरियो सो लागे,

ऐसो पीहर ससरियो भी रोज ही जानो चाहे,

जद जद याद करू मैं थाने जोर सु हिचकी आवे है,

ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

सारी सारी रात ओ मैया नैना मैं झुंझुन घूमे,

पलको से निंदिया की चिड़ियाँ हर दम उड़ जावे,

भूख लगे न प्यास लगे माँ हिवड़ो भर भर आवे है,

ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

अडोसी पडोसी सगळा सो कैसा है रिश्तो अपनों,

माँ अपनी बेटी ने खुद से दूर रखे दिन कितनो,

आइए न धूड़कार के इब तो दुनिया हासी उड़ावे है

ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।