अपना हरी है हजार हाथ वाला

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मैं कहता डंके की चोट पर, ध्यान से सुनेओ लाला,

अपना हरी है हजार हाथ वाला।

क्या कहना समर्थ साईं का क्या से क्या कर डाला॥

कौन बटोरे कंकर पत्थर जब हो हाथ में हीरा।

कंचन सदा रहेगा कंचन और कठीरा कठीरा।

सांच के आगे झूठ का निकला हरदम यहाँ दिवाला॥

कोई छुपा नहीं सकता जग में अपने प्रभु का झंडा।

जो उसको छेड़ेगा उसके सर पे पड़ेगा डंडा।

युगों युगों से इस धरती पर उसी का है बोल बाला॥

वो दीनदयाला है रखवाला।

क्या मारेगा मारने वाला॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।