जय जय नारायण नारायण हरि हरि

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

जय जय नारायण नारायण हरि हरि,

स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि,

तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि॥

अलख निरंजन, भवभय भंजन ,जनमन रंजन दाता।

हमें शरण दे अपने चरण में, कर निर्भय जगत्राता।

तुने लाखों की नईया तारी तारी हरि हरि॥

प्रभु के नाम का पारस जो छूले वो हो जाए सोना।

दो अक्षर का शब्द हरि है, लकिन बड़ा सलोना।

उसने संकट टाले भारी भारी हरि हरि॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।