समराथल वाले करियो विग्न सब दूर

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

समराथल वाले करियो विग्न सब दूर

पींपासर मे आप विराजे,समराथल थारो आसन साजे

ढोल नगाङा नोपत बाजे मुख पर बरसत नूर

विष्णु जी के हो अवतारी,तीन लोक मे महिमा भारी

पूजे बालक ओर नर नारी म्हाने विधा देवो भरपूर

जैसलमेर के जेतसिंह राजा,उनकी राखी तुमने लाजा

मिट गई कोढ बदन भए ताजा आए सकल हजूर

उमा बाई ने भांत भरायो,खेजङिया रो बाग लगायो

जोखो जी मन मे शरमायो कियो घमण्ड सब चूर

देश-देश से नर पती आए,अनुभव ज्ञान अग्न झङवाए

बङे-बङे राजा परचाए भया भरम सब दूर

जम्भगुरू ने संसार मनावे,सबका बेङा पार लगावे

सदानन्द थने शीश नवावे आईजो आप हजूर

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

M.9460282429

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।