थे तो जाम्भा जी म्हारे

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

थे तो जाम्भा जी म्हारे,घणा मन भावणा,

भक्त बुलावे थाने,आया सरसी ,

थे तो गुरू जी म्हारे,हिवङे रा चानणा

दर्शन री प्यास बुझाया सरसी

था बिन फीको है इण, जग माही जीवणो

दर्शन आस पुराया सरसी थे तो

था बिन सूनी लागे,समराथल री झाङियाँ

ग्वाला ने दरश दिखाया सरसी थे तो

था बिना सूनो-सूनो,लागे म्हाने आँगणियो

आकर जोत जगाया सरसी थे तो

पींपासर री झाङीयां मे,गाउवां चराई

पाणी सू दिवलो जगाया सरसी थे तो

सदानन्द री गुरू जी सुणियो बीणती

भव हूं पार लगाया सरसी थे तो

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

M.9460282429

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।