मन रे कर सत्संग सुख भारी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मन रे कर सत्संग सुख भारी

नारद की काटी चौरासी ,कालू कीर की राय,

लादु अजमल तीर गया ,पुत्र नारायण लो लगाय,

सज्जन कसाई सुधारिया ,बकरी का उपदेश,

लादु पापी पार हुआ ,यह सत्संग का संदेश,

मन रे कर सत्संग सुख भारी,

ऐसा जनम फेर नही आवे ,समझो हिये विचारी,

गंगा यमुना पुष्कर गोमती, आशा सब मे धारी,

तीर्थ का पाप सत्संग में जड़ता ,सुणावे गुणाकारी,

सत्संग बिना समझ नही आवे ,झूठा बणे मणधारी,

खुद में कस्तूरी मृग भटकता, भटकत भटकत हारी,

ब्रह्मा विष्णु महेश्वर देवा ,तीनो की हद न्यारी

करो आस पास सत्संग की, बण जाओ अधिकारी,

गोकुल स्वामी देवा ,आप मिल्या अवतारी,

लादूदास आस सत्संग की ,करज्यो भव से पारी,

भजन गायक - चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी

89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।